अनुसंधान के मुख्य अंश  

 

 

 

उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान

 (भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद्)

डाकघर -आर.एफ.आर.सी. मण्डला रोड, जबलपुर-482021, भारत

 

 

 

मंतव्य  

उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान एक अग्रणी संगठन है जो मध्य भारतवर्ष में विभिन्न राज्य जैसे छत्तीसगढ, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र एवं ओडिशा राज्य में विभिन्न वानिकी की उत्पादकता एवं गुण्वत्ता  सुधारने की दिशा में नवोन्मेषी अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकसित करने से जुड़ा हुआ है ।  इसके अस्तित्व में आने के दो दशक से अधिक कालावधि में संस्थान ने वानिकी अनुसंधान की दिशा में काफी अनुसंधान एवं कई प्रौद्योगिकीयो के सफल क्रियान्वयन के विभिन्न पहलुओं में सरहानीय योगदान दिया है ।  हालांकि, ये कार्य बिखरा हुआ है और इसे राज्य वन विभागों, गैर सरकारी संगठनों, वन आधारित उद्योगों, वन नीति निर्माता आदियों के हितलाभ हेतु समेकित करने की आवश्यकता है। इस उद्येश्य की पूर्ति हेतु वर्तमान में संस्थान ने वानिकी क्षेत्र में विविध विषयों के विशेज्ञों से परामर्श कर प्रलेख तैयार किया है और उसे चार अध्याय में शामिल किया है जो वन उपयोगकर्ताओं के लिए संक्षेप में वाकपटुता से उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है ।  विश्वास है कि, संस्थान में विकसित अनुसंधान सामग्री उपयोगकर्ताओं के समझ में आयेगी और संस्थान स्तर पर विकसित की जा रही प्रौद्योगिकी वनोपज कार्य में उन्हे उपयोगी अवश्य साबित होगी ।  फलतः संस्थान द्वारा वानिकी क्षेत्र में विकसित प्रौद्योगिकी प्रलेख सामाजिक-आर्थिक तौर पर अदिवासियों और देहाती लोगो के उत्थान के साथ-साथ पर्यावरण के सुधार सुनिश्चत करने के अलावा वन आवरण और उत्पादकता, स्थायी वन संसाधनों के उपयोग और नीति निर्माण को बढ़ाने के लिए वन उपयोगकर्ताओं और विषय विशेज्ञों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने में मददगार साबित होगा ।  अंत में, यह प्रलेख तैयार करते समय हमने यह ख्याल रखा है कि, इस प्रलेख में कोई विसंगतियाँ न  हो,  फिर भी, इसमें कोई विसंगतियाँ  दृष्टिगोचर हो तो, भविष्य में प्रलेख में आगे सुधार लाने हेतु हमारे ध्यान में लाया जा सकता है । 

 

                                                                                                                                            डॉ.  यू. प्रकाशम,

                                                                                                                                                   निदेशक

                                                                                                                                उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर

 

अंतर्वस्तु
  •  बुनियादी वैज्ञानिक सूचना

  •  प्रौद्योगिकी / प्रणाली

  •  प्राचलन पद्धति संवेष्टन

  •  जननद्रव्य एवं उत्पादन संख्या


 बुनियादी वैज्ञानिक सूचना

 कृषिवानिकी

  • संस्थान के कृषिवानिकी प्रभाग ने नागपुर, रायपुर एवं जबलपुर डिपो से तथा वनों पर आश्रित आदिवासी वन क्षेत्र  से वनोपज,  जैसे कि, गोलाकार इमारती लकड़ी, चिरी हुई लकड़ी, ईंधन लकड़ी (शोरिया

    रोबुस्टा, टेक्टोना ग्रैंडिस, गन्धसफ़ेदा तथा बांस प्रजातियों का विपणन दर हेतु डाटाबेस तैयार किया ।

     

जैवविविधता

  • प्रमुख वन प्रजातियों के कैनोपी को संरक्षण भूखंडों और राष्ट्रीय उद्यानों से हटाया गया  परिणामस्वरूप वन भूखंड एवं राष्ट्रीय उद्यान में बडी मात्रा  में परिरक्षण वितरण में परिवर्तन हुआ है ।  पैडी ओरिझा ऑफिसिनलाईस एवं ओ परेन्निस दो वन्य प्रजातियों को तडोबा राष्ट्रीय उद्यान में अभिलेखित किया गया है ।

  •  परिरक्षित भूखंड  वन रोपण प्रजातियों के विविधता सूचकांक एवं रोपण पौध प्रजातियों को संयंत्रित किया गया ।

  • वन  प्रजातियों का घनत्व  बरसात के मौसम में अधितम करने हेतु वृद्धि हुई  है  और गर्मियों में न्यूनतम हुई महत्पूर्ण मूल्य सूचकांक  गर्मि के मौसम में उच्चतम माया गया  ग्राउंड फ्लोरा  मिट्टी पीएच  उपलब्ध मिट्टी में  फास्फोरस और मृदा की बनावट में परिवर्तन पाया गया ।

  • विविधता घास की परत के सूकांक और प्रभूत्व की एकाग्रता क्रमशः ऊंचाई 1100-1352 मी रेंज में 1000 मीटर और 2.57 मी और पर और  0.059 मी. और  3.85 और 0.03 38 रही ।

  • टी.एफ.आर.आई. परिसर के 150 लकडी का संसाधन और 83 प्रजातियों के पेड़, 64 झाडियाँ, 10 पर्वतारोहीयाँ और बांधवगढ. राष्ट्रीय उद्यान से 51 जड़ी बूटियाँ नवीनतम नामकरण, परिवार, आदत और उपयोग करता है के साथ पहचान की गई ।

  •  जबलपुर (मध्य प्रदेश) से नीम के पेड़ के बीज संग्रहित करने लिए  अच्छा समय होता है जिसका  कार्य किया  गया मध्य प्रदेश के सागर महाराष्ट्र के बल्लारशाह तथा ओडिशा के गुणपुर को मध्य भारतवर्ष के नीम बीज संग्रहण हेतु उचित स्थल के रूप में पहचाना गया ।

  • नीम के बीज  परिपक्वता और पकने का कार्यकाल जून से जुलाई माह के दूरसे सप्ताह तक और सागौन के बीज जनवरी से दिसम्बर माह के दौरान हुआ ।    

  • ग्राऊंड फ्लोरा  की अधिकतम विविधता जेमेलिना अरबोतया, युकिल्प्टिस हैब्रिड, टरमिन्डस इंडिका, बुच्चमिया लारवान, मिर्गिना  परविफ्लोरा एवं डलबर्जिया सिस्सू वनरोपण भटलैंड वनक्षेत्र में पाया गया ।  प्रजातियों की विविधता सूचकांक वन प्रजातियों के संरक्षण के दारान अनुकुल रही ।

  • वृक्ष प्रजातियों की विविधता नऊराडेही डब्ल्यूएलस, सिंगापुर रेंज में अधिकतम रही । टेक्टोना ग्रैंडिस के उत्थान सारा रेंज में अधिक रहा ।  मोहली रेंज प्रजातियों के पेड़ की संख्या सबसे ज्यादा घनत्व एवं उत्थान के अनुरुप रही ।

  • 30 से.मी./जीबीएच से अधिक तृक्ष प्रजातियों कोर क्षेत्र की तुलना में बफर  नरुदेही डल्यूएलएस एवं कोर क्षेत्र से और भूवनसंपत्त्यो की विविधता जीबीएच की तुलना में अधिक होना अभिलेखित किया गया।

  • वन मूल के पौधों की पारंपरिक  प्रथा का उपयोग करते हुए  मध्य प्रदेश तथा छत्तीसर्गढ़ के पांच नये ओरिजिन बैगा, भारिया, गोन्ड एवं हिल कोरवा को प्रलेखित किया गया ।

  •  ग्राऊड फ्लोरा विविधता सभी पांच परिक्षित वन क्षेत्र जैसे अल्लापल, कोयना, वाघोत्रे, भीमाशंकर, सेमडोह एवे चिखलदहरा  में विकसित की गई ।

 

परिस्थितिविज्ञान  

  • हैपटि, अरिस्टिडा, एराग्रास्टिस, अर्जेमोन आदि जैसे प्रमुख पेड़ प्रजातियाँ कॉपर माईन, सेलोसिया, ट्रिडेकस क्रोटोलैरिया आदि में कॉपर माईन्स एवं अरिस्टिडा एराग्रोस्टिस, कैलोट्रोपिक, टेफ्रोसिया आदि आईरन माईन में प्राकृतिक उत्तराधिकार में प्रदर्शित किया गया।

  • थर्मल पावर  प्लान्ट से उत्सर्जन, परिसर कोरबा  औद्योगिक  (छत्तसगढ़) के आस-पास मिट्टी के नमूने में जैविक कार्बन, सल्फर और उपलब्ध पोऐशियम और वृद्धि की पीएच, कुल और उपलब्ध नैट्रोजन एवं फासफरस की कमी हुई ।  थर्मल पावर प्लान्ट उत्सर्जन संयत्र में क्लोरज और नेक्रोरज़ तथा नेक्रोसिस के पत्तों के कारण होता है और पत्ते एन,पी और के फोलियर कम किया ।

  • चचई (मध्यप्रदेश) के फ्लाईस डिकस में प्राकृतिक उत्तराधिकार में  33 से तीन से छह महीने की उम्र से पौध प्रजातियों की संख्या में प्रयोग प्रणली से वृद्धि हुई । 

  • फ्लाईस डाइक में बैक्टीरिया एवं एक्टिनॉमिसेट्य तेजी  डाइक्स और वनस्पति के विकास के उम्र के साथ वृद्धि हुई ।

  • फोलियर प्रोटिन, पॉलिफेनल्स, एन.के. कुल कार्बोहाइड्रेट, नमी, पी, सीए, मिलीग्राम तथा क्लोरोफिल डिफोलियटर्स टेक्टोना ग्रैंडिस में अल्बिजिया प्रोसेरा, शीशम एवं बांस के प्रतिकुल प्रतिरोधक पाये गये ।

  • सागौन की प्रतिरोधी क्लोन अर्थात ओडिशा के ओआरएएनआर-3  तथा महाराष्ट्र के एमएचएससी-सीए3 के प्रतिकुल स्केलेटोनाइजर, युटेक्ओना मचियरलिस तथा डिफोलियटर, हैबिया प्युरिया प्रयोग कर जाँच की गई ।

  • मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा से नीम के एझाडिरैच्टिन एवं तेल मात्रा युक्त फेनोटाइपिकली सुपरियर वृक्ष चयनित किये गये ।

  • नीम बीज के  उल्लेखनीय उद्म विभिन्नता पायी गई और मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा के 18 एग्रोक्लाइमेटिक संभाग से नीम के वृद्धित पैरामिटर्स संग्रहित किये गये ।

  • जेएफएम के जरिए निम्नीकृत वन संरक्षण के लिए प्रयोग प्रणाली का प्रयोग कर काफी पौध प्रजातियों की संख्या में वृद्धि कर मृदा की उर्वरता विकसित की गई और मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में वन आश्रितो की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का उत्थान किया गया ।

  • मिश्रित वृक्षारोपण की तुलना में सागौन  वृक्षो अहम वृद्धि  की और उसे मोनोकल्चर में अभिलेखित किया गया ।

 

कीटविज्ञान

 

मध्य भारत में एलबिझिया प्रोसेरा एवं ए लेब्बेक छती पहुचानेवले बीजछेदक की दस प्रजातियाँ, निष्पत्रक की 29 प्रजातियाँ, प्ररोह छेदक की  11 प्रजातियाँ एवं रसचूषक कीटों की 6 प्रजातियों की पहचान कर अभिलेखित किया गया ।

  • युरेमा प्रजाति तथा  रेहसला प्रजाति के विकास स्तर एबिसिया प्रजाति के निष्पत्रको का प्रथम बार अध्ययन किया गया । 

  • एक प्रमुख दीमक (ब्रुचस बिलिनियटोपिजस) के प्रकृति, आवास,जैविकी तथा नियंत्रण उपाय का  पहली बार अध्ययन किया गया । 

  • बीजछेदक के, ब्रुचस बिलिनियाटॉपिजस जीवन चक्र की जाँच एक वर्ष मे पूर्ण की जानी है ।

  • बांस पत्ते रोलर की जैविकी, क्रिप्सीप्टीया कोस्लेसलिस प्रयोग परीक्ष किया गया ।

  • अल्बिजिया पत्ते फिडर की बायोनॉमिकस, स्पीरमा, रेटोरेटा का प्रथम बार प्रयोग से अध्ययन किया गया ।

  • नोना स्क्वामोसा, लैंटाना कैमारा, का पत्ता निकालने प्रोसेरा और बेहया, एजडिरैहक्टा इंडिका के बीच निकालने और सागौन निष्पत्रक तथा स्केलेटोनिजरका 1.0 प्रतिशत हिचकते खीला व्यवहार की एकाग्रता में नीम आधारित वाणिज्य उत्पाद का प्रयोग अध्यययन किया गया ।

  • 18 सागौन क्लोन अर्थात् ओआरएएनआर3, ओआरएएनपी-7, ओआरएएनपी-4 (ओडिशा), एमएचएससी-ए 3, एमएचएएल-पी5, एमएचएएल-पी9 एमएचएससी-जे2, एमएचडब्यूवाई              के-1(महाराष्ट्र), पीटी-46 (मध्य प्रदेश), एमवाईएचवी-3 एसटी-6, एसटी-14 एसटी-17 (कर्नाटक), टीएनटी-3 टीएनटी-17 (तमिलनाडु), युपी-डी एएनडी युपी-एन (युपी) निष्पत्रक एवं पत्तों का प्रयोग परीक्षण किया गया ।

  • बांस में बाम्बुसा व्युल्गरिस (हरित) एवं मेलोकैन्ना बाम्बुसॉईडस लिफ रोलर (सी कोकलिसलिस) पर प्रयोग प्रदर्शन किया गया ।

  • बेंजिप में रेक्रिस्टलाईज्ड साल छाल का इथेनॉल निकालने से अलग एक सफेद क्रिस्टलीय यौगिक साल लकड़ी छेदक भृंग के प्रतिकुल कैरोमोन रूप में अनुसंधान कार्य किया ।

  • भृंग आकर्षित करने के लिए जाल के रूप में इस्तेमाल किया गया है, जो पीटा साल लॉग पर एंडोसल्फान का 0.05%  पानी पायस का छिड़ाव द्वारा विकसित साल निप्पत्रक के प्रत्येक नष्ट करने की दिशा में नई प्रयोग प्रणाली विकसित की गई ।  

  • कनहा राष्ट्री उद्यान से हैपोलिम्नस मिसिप्पस, कैल्लिमा एवं एक्टियास सेलेन जैसे तीन बलशाली कीटक सहित तितलियों की 53 प्रजातियाँ, पंतिगों की 127 प्रजातिया।  भृंग की 23 प्रजातियाँ,  हैमेनोप्रेरन्स की 7 प्रजातियाँ, टिड्डे की आठ प्रजातियॉ, झींगुर की चार प्रजातियाँ, कीड़े की छह प्रजातियाँ, मैन्टीड की 4 प्रजातियाँ, दीमक की एक प्रजाति एवं कर्णकीट की एक प्रजाति को पहचाना गया ।

 

रोगविज्ञान

  • मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्त्तीसगढ ओडिशा के 346 व्याधि सहित 118 परपोषियों से 32 नयी व्याधियों को अभिलेखि किया गया ।  26 पत्ते, 6 रूट और 5 दिल-सड़ांध रोगों को विभिन्न पौधशालाओं, वनरोपण क्षेत्र एवं प्राकृतिक वनों से पहचानकर अभिलेखित किया गया । कवक की 12 नई प्रजातियों के वर्गिकरण वर्णित किया और उन्हे प्रभाग में बनाये रखने हेतु अभिलेखि किया गया ।

  • मध्य प्रदेश, महाराष्ट, छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा से विभिन्न उपभेदों के उर्वरक (वीएएम, रिझोबिया, एझोटोबैक्टर, पीएसबी) संग्रहित किये गये एवं क्षेत्र एवं प्रयोगशाला प्रयोग द्वारा  दक्ष उपभेदों को अलग-थलग किया गया ।

  • बोर्थ (broth )एवं  वाहक आधारित इनोक्युला उत्पाद के लिए  समष्टि उत्पादन तकनीक विकसित की गई ।

  • एजोटोबैक्टर तथा एजोस्पिरिल्लम संयोजन से सागौन एवं बांस का सुगमता से विकसित किया गया  ।

  • सिवनी (एम.पी.) में फेलिनस कैरियोफिलि के उत्पिडन से हर्ट रोट से चंदन की गिरावट दर्ज की गई ।  आग, चराई और उपयुक्त होस्ट वृक्षारोपण के माध्यम से प्राकृतिक पुनर्रजनन उत्प्रेरण के संरक्षक को संस्तुत किया गया ।

  • वीएएम कवक का एकल अनुप्रयोग या हिंजोबियम के साथ संयोजन में गौरतलब उच्च शुष्क बायोमास एवं अंकुर मात्रा का उत्पाद किया गया । 

  • वीएएम कवक जब रिजोबियम से इनोक्युलेशन किया तब डालबर्जिया सिस्सू एवं प्रोन्गैमिया पिन्नाटा अंकुरण का कोलोनाइजेशन वृद्धित हुआ । 

  • वीएएम उनुप्रयोग कर नीम पौधों के विकास एवं अस्तिव में वृद्धि की गई ।

  • पौधशाला के जैवउर्वकों के अनुप्रयोग से सागौन के अंकुरित पौधों के विकास में वृद्धि की गई । 

 

आनुवंशिकीविज्ञान

  • महाराष्ट्र प्रांत में उत्पत्तीत सागौग की आनुवंशिकी  भिन्नता को प्रयोग प्रणाली का प्रयोग कर प्रदर्शित किया गया ।  योज्य एवं अयोज्य के जीन कार्यों नियंत्रित दोनों के विकास वर्ण (ऊंचाई, परिधि और बेसल क्षेत्र) ।  उच्च सामन्य संयोजन की क्षमता के साथ सागौन के बाहर अभिजात वर्ग क्लोन की जांच की गई । 

  • दक्षिण भारती सागौन के ऊंचाई, (घेरा एवं बेसल क्षेत्र)  के 11 सागौन इलाईट क्लोन की पहचान की गई   

  • ओडिशा मूल के सागौन का उपयोग कर एक प्रारंभिक (जुवनिल) अवस्था में जेनेटिक अनुमानों परिपक्व अवस्था के पैटर्न को सकारात्मक संयोजन सामान्य क्षमता (अभिजात वर्ग के क्लोन)  परिक्षित किये

  • अन्बिजिया प्रोसेरा के 9 फिनोटाइपिकली  बेहतर पेड़ प्रजातियों का चयनित  किया गया ।  महत्वपूर्ण आनुवंशिक परिवर्तन फली लक्षण (फली और बीज की लंबाई, फली और बीज चौड़ाई, बीज वजन) और अंकुरण लक्षण के लिए पेड़ (अंकुरण प्रतिशत, अंकुरण वे सूचकांक और  वृद्धि सूचकांक)  प्रयोग परीक्षण किया गया।  योज्य जीन कार्य के दबाव से   बीज एवं बंकुरण मापदंडो का दृढ़ता से प्रयोग परीक्षण कर अंकुरण परीणाम प्राप्त किया गया । 

  • सागौन के 25 नए फिनोटाइपिकली बेहतर पेड़ो को वांछनीय लक्षण के साथ चयनित किया गया   महत्वपूण फल परिवर्तन (फल लंबाई, चौडाई, वजन, भरा लोक्युल्स की संख्या और वजन) हेतु परीक्षण किया गया   फलों का आकार गुणता (स्वस्थ) के बीज का एक महत्वपूर्ण कसौटी के रूप में संग्रहित किया गया है   हेरिटेबिलिटिस और लकड़ी के लक्षण अंत काष्ठ प्रजिशत, एसएपी लकड़ी प्रतिशत, छाल मोटाई और विशिष्ट गुरूत्व) के लिए आनुवंशिक लाभ मजबूत मूल्यों के लिए उदार है, करने हेतु अनुमान लगाया   आम संयोजित क्षमत युक्त 12  वृक्ष प्रजातियों के पेरेन्ट् की प्रयोग कर पहचान की गयी

  • कार्बोनिक एन्धिड्रास गतिविधियों के मौसम, आयु, पत्तों की स्थिति और जीनोटाइप के साथ  फ्लुच्युवेटेड एंजाइम की एसे एकल आइसोजाइम टीक निरीक्षण उपरान्त देखा गया   कार्बोनिक एन्धिड्रास गतिविधि काफी सकारात्मक 47.6% अर्धउप एसआईबी वर्ग में प्रकाशन संश्लेषण के साथ परीक्षण किया गया  

 

अकाष्ठ वनोत्पाद (एनडब्ल्यूएफपी)

  • पोषहार मापदंडो पॉलिमोर्फा 2.02-48% कार्बोहाइड्राइट, 3.20-30.81% प्रोटिन, एवं 0.1-0.71% खनिजों के रूप में लेकर बाम्बुसा सहित 15 वन प्रजातियों के विभिन्न वन प्रजातियों के पत्ते, बीज, फूल, फल कालियाँ बाबुसा  न्युटन्स, बाम्बुसा एरुन्डिनेसिया, मेलोकैना बैसिफेरा डेन्ड्रोकैलमस लॉगजिपेठस, लाँगजिपेठस स्ट्रिक्टस, डेन्ड्रोकैलमस , स्टेतक्युलिया युरेन्स आदि प्रयोग परीक्षण किया गया  

  • गैर-पोषक घटक 0.34-6.82% टैन्निनस एवं स्टेरक्युलिया फोइटिडा में 18.93-21.06%  फिनोल, अमलतास, बबूल  कैटेच्यु एं गुरूगा पिन्नाटा के रूप में दर्शित किया गया

  • बिलासपुर एवं माइयानाला द्वारा अनुसरण कर बांस (डेन्ड्रोकैलमस स्ट्रीक्टस) की मोटिनाला प्रोवेनन्सेस का प्रदर्शन ऊंचाई, कॉलर व्यास अंतर नोडल लंबाई और एक बाढ़ के मौसम में बेहतर पाया गया

  • डेन्ड्रोकैलमस लाँगिसपैथस (सिन्धुरी बांस) को पहल बार उत्तरी सरगुजा जिले के शंकरगढ़ वन क्षेत्र छत्तीसगढ़ से  संग्रहित कर अभिलेखित किया गया

  • एनएए के 200 पीपीएम के अनुप्रयोग अधिकतम शाखा रूटिंग कलमों में पक्ष और बाम्बुसा व्युलगेरिस (हरा) और डेन्ड्रोकैलमस मेमब्रैनासियस की कल्म कलमों में 100 पीपीएम बोरेक्स प्रेरित किया गया ।

  • तेंदू (डियोसपिरस मेलेदवक्सिलोन) जर्माप्लाजम कोल्कास-1550, लेम्नि 1440 एवं टैडोबा 1430 प्रति फल बीज की संख्या के संबंध में बेहतर पाया गया  

  •  कोरबा से टैण्डु जर्माप्लाजम बीज उच्चतम (67%) अंकुरण प्रदर्शित किया गया   टैण्डु रूट स्तर पर मुश्किल पाया गया  

  • एम.पी., छत्तीसगढ़, एम.एस. ओडिशा, कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु से सिम्बोपोगोन मार्टिनि के बाइस जर्मप्लाजम संग्रहित किये गये ।  झबुआ के साथ बस्तर से (0.65%) जर्मप्लाजम अधिकतम तेल मात्रा के पाये गये ।

  • कोबरा एवं रायसेन से बैइल (एइगल मार्मिलोस) जर्माप्लाजम्स ऊंचाई एवं व्यास वृद्धि में उच्चतम पाये गये । 

  • सागर से जर्मप्लाजम में ऊंचाई जर्मिनेशन प्रतिशत (98%)अभिलेखित किया गया ।  

  • ग्वालियर एवं पन्ना से एओन्ला (फिलैन्थस एम्बिलका) का वृद्धि निष्पादन  हुआ, ग्वालियर से ऊच्चतम जर्मिनेशन (92%) अधिकतम रहा ।

  • महुवा के चीनी तथा तेल प्रतिशत एम.पी. सी.जी. ओडिशा, एम.एस. एवं यु.पी से क्रमशः 59.82 71.86% एवं 37.13  44.61% से विभिन्न रहा ।

  • मुल्ताय (बेतुल एवं बडभाल (सुन्दरगढ ) से चिरोन्जी  (बुचमनिय ) लैनजैन)  के जर्मप्लाजम  48.50% तेन और 19% प्रोटीन का  प्रयोग प्रदर्शित किया गया ।

  • जट्रोफा बीज का तेल वजन घटाने में 75-90% की कमी के साथ अम्रफल की लकडी पर  दीमक एवं कवक रोधक गुणकारी रहा ।

  • पी. हिस्टेरोफोरस के एरियल हिस्से से पैरथेनिन आइसालेटेड पेस्टिसाइड गतिविधियाँ पाई गयी ।

  • जनवरी के दुसरे पखवाडे में क्युरक्युमा एग्स्टीफोलिया के उच्चतम गुणता स्टार्च उत्पादित होने के पाये गये ।

  • हैप्टिस सुवेओलेन्स के म्युसिलेज अगरबत्त बाइंड करने में अच्छे साबित हुए ।

  • सैपोनिन ग्लायकोसोड्स का एक्सट्रैक्शन क्लोरोफिटस बोरिविल्लिनम में 1.09-1.78% (ट्युबर्स), एसपैरेगस रेसिमोसस (रूट्स) में 1.20-14.69% मैडयुका इण्डिका के पल्प बीजों में 6.89-8.92% तथा जेट्रोफा क्युरकेस में 2.19-3.55% पाया गया । 

  • स्पिन्डस मारोस्सि्, एम इण्डिका एवं जैट्रोफा  क्युरकेस  से सैपिन्डस मुक्रोस्सि , सैपोनिस एवं जटरोफा फैगोडेटकरेस्सि्/ मोरटैलिटि टी कैसटेन्युम प्रति चावल फसल के लिए आठ माह सुरक्षा प्रदान करने में उपायकारी रहा ।

  • पीएच में घटाव,  चिपचिपाहट एवं कार्बोहैड्रेट सामग्री में बबूल निलोटिका, एनोजेस्सियस लैटिफोलिया एवं स्टेरक्युलिया युरेन्स से वृद्धि होने आसार पाये गये ।  विनेगरी ओडुवर एस. युरेन गोंध के साथ वृद्धि पायी गई ।

 

वनवर्धन एवं जेएफएम

 

  • अधिकतम जड नोड्युल्स एकेसिया निलोटिका  में 12.5 पीपीएम एन, 50 पीपीएम पी 50 पीपीएम के के संयुक्त अनुप्रयोग पर  एकेसिया निलोटिका के अधिकतम (46.6) जड़ नोड्युल्स गठित किये गये ।

  • अवक्रमित मृदा में तृक्ष प्रजातियों सापेक्ष उपयुक्तता सूचकांक  तैयार किये गये । 

  • अवक्रमित मृदा में वृक्ष प्रजातियों का सापेक्ष उपयुक्तता सूचकांक तैयार किया गया ।  डालबर्जिया सिस्सू एवं डी. लेटिफोलिया प्रयोग करके अति उपयुक्त होने वाले वृक्ष प्रजाजियों को 100% अल्बिजिया प्रोसेरा स्कोरिंग निर्गत किया गया । 

  • तीन एमपीटीएस वृक्ष प्रजातियाँ नामतः जेमिलिना अरबोरिया, एझाडिरैच्टा इंडिका, लेयुसेनिया लेयुकोसेफला मध्य भारतवर्ष के अर्ध शुष्क  शुष्क  वन क्षेत्र में विकसन के लिए उपयुक्त पाई गई ।  बीज  अंकुरण तथा उसके पैरामिटर्स के प्रसंग में विभिन्न प्रोवेनन्स पाई गई ।  बीज साधन जोकि  उमरिया,  शहडोल (एम.पी.) बालाघाट, सिवनी (एम.पी.) एवं शक्ति (एम.पी.) का प्रदर्शन अच्छा विकासित एवं वृक्षारोपण हेतु संस्तुतित पाया गया ।

  • पोपुलस डेलिटॉईड्स के तीन क्लोन (जी-48, 7 सी1 एवं 65/27) जबलपुर वन क्षेत्र में उपुक्त पाये गये । उच्चतम उत्पादक क्लोन 65/27 छिंदवाड़ा एवं जबजपुर के किसानों के वन खेति में संस्तुतित पाये गये ।

  • कार्बन सिक्वेस्ट्रेशन दर चयन सह सुधार वन-संवर्धन प्रणाली की तुलना स्पष्टतः अधिक पायी गई ।

  • पूर्णतः गिरे हुए वृक्षों की तुलना में चयन सह सुधार प्रयोग क्षेत्र में वृक्ष पुनर्जनन बेहतर रहा । चयन सह सुधार  किये वृक्ष लगभग समान रूप से सभी जीबीएच वर्गो में वितरित किये गये ।

  • स्पष्ट कटाई के मामले में, मृदा पीएच, जैविक कार्बन एवं उपलब्ध एनपीके का प्रतिशत घटते ट्रेंन्ड के दर्शित हुए ।

  • एकेसिया कैटेच्यु (खैर) संग्रहित बीज 2% नमी मात्रा 0.सी एवं 5. सी  एक वर्ष जीवनक्षमता में काई महत्वपूर्ण घटाव नहीं पाया गया ।

  • प्टेरोकारपस मार्सूपियम (बिजलस ) बीच संग्रहित 0.सी एवं 5.सी एक वर्ष बेहतर प्रजनन पाया गया ।

 

प्रौद्योगिकी प्रणाली

जैवविविधता

  • न्युनतम लागत फिटोहोर्मोनस जैसे रूटेक्स बी एवं प्रोन्टेक्स पावडर्स प्रयोग कर फल उपजाऊ वृक्ष (आम), जामुन, कटहल, कडम, सिताफल, नीम्बु, आमरुद आदि), अवेन्यु वृक्ष (मूलसरी, सिल्वर ओक एवं ओरनामेंटल्स के बहुसंख्यक प्रजातियों)के शूट कटिंग द्वारा प्रवर्धन पूर्ण किया गया ।

 

परिस्थितिकी विज्ञान

 

  • वृक्ष प्रजातियाँ पिथेसेलिबियम ड्युल्स, सिमरुबा ग्लाउका तथा एकेसिया मैंग्जियम कोयले की खदानों हेतु; जेमेलिना अरबोरिया, युकेलिप्टस कैमैल्डुलेन्सिस एवं युकेलिप्टस टेरेटोकार्निस कॉपर हेतु तथा लिवकेइना लेयुकोसेफोला, ई टेरेटोकॉर्निस एंव अब्जिया प्रोसेरा जैसे  लोहे खदान हेतु खनन -बाहर के क्षेत्रों को पुनः प्राप्त करने के लिए उपयुक्त पाये गये ।

  • आईबीए के 2000 पीपीएम 30 सेंकद डिप समय नीम के वानस्पतिक प्रवर्धन  हेतु अच्छा उपचार साबित हुआ ।

 

कीटविज्ञान

  • 29  में से ट्रिचोग्रेम्याटिड ईजीजी पैरासिटॉइड्स ट्रिक्रोगामा रावई सागौन कीटकके गुणन नियंत्रण के लिए संभाव्य पहचान कर अभिलेखित किया गया ।  इस पैरासिटॉइड की गुणन तकनीक विकसित की गई ।

 

रोगविज्ञान

  • बारह माईकोर्रिझेइ निर्मित कवक अमरकंठक, पचमड़ी (एम.पी), जगदलपुर (सीजी) कोरापु (ओडिशा) में स्थित साल वन, उष्णकटिबंधीय पाइन्स एवं युकेलिप्टस वनरोपणी से पहचानकर अभिलेखित किये गये ।  इस प्रयोग प्रणाली को स्क्लेरोडर्मा वेर्रुकोसुम आईसोलेटेड, गुणीय एवं पौधशालाओं में अभिसात किया गया ।

  • 3 खाद्य मसरुम जैसे कि ओल्वेरिइल्ला ओल्वेसिया, एगरिसस बाइस्पोरस एवं प्लेयुरोटस प्रजातियाँ वन खेती तकनीक के लिए मानकीकृत की गई एवं उपयोगकर्ता वर्ग जोकि गाम पंचायतों, ग्राम समितियों, राज्य वन विभागों के प्रयोग हेतु प्रदर्शित की गई ।

  • वीएएम रिहिजोबिया कवक के प्रभावी उपभेद  बांस, सागौन, अल्बिजिया प्रोसेरा, ए. लेब्बेक कल्चर्ड से अलग-थलग किये गये एवं वन राज्य विभाग, गैर सरकारी संगठन, किसान सहित वन उपयोगकर्ता जनसमूह को प्रदाय किये गये ।  

  • एन- फिक्सिंग बैक्टीरिया एवं पीएसबीएस के साथ वीएएम प्रयोगप्रणाली विकसित की एवं सेफ्ड म्युस्ली (क्लोरोफिटम बोरिबिल्लियमम) वृद्धि की एवं उत्पादकता को बढ़ाया गया ।

  • वृक्ष प्रजाति-विशिष्ट जैवउर्वरक के बडे पैमाने पर उत्पादन हेतु तकनीक विकसित किये ।

 

वन आनुवंशिकी

  • बीज उत्पादन क्षेत्र (एसपीए) स्थापित करने के लिए एक सुधारित प्रयोग प्रणाली विकसित की गई ।

  •  वृक्ष जड़ सतह क्षेत्र माप हेतु प्राविहित आधार पर सतह क्षेत्र से वृक्ष जड़ों से नाइट्राइट के सोख/निसोख क्षेत्र मापन का विकसित किया गया । 

  • डलबर्जिया सिस्सू में, युवा कलमों> पतली कलमों>मोटी कलमों आकस्मिक जड़ों की प्रेरण पैटर्न  प्रदर्शित किये गये । 12 या 6 साल पुराने पेड़ों के 24 हे. से अर्ध  दृढ़ लकड़ी कलमों हेतु क्रमशः 800 या 50 पीपीएम की व्यवस्था > 70-90%  आकस्मिक जड़े इन्डुस की गयी ।  पोंगमिया पिन्नाटा मे, 800पीपीएम आईबीए 100% के 100% धुन पर काफी बेहतर साबित हुई । 

  • अपस्थानिक थिझोजेन्सिस मौसम विशिष्ट रहा तथा कतरन आकार एवं आईएए उपचार वर्ष के उष्ण मौसम के दौरान जलवायु के अनुकूल मददगार साबित रहा ।  अप्रैल माह में दुगुने/तिगुने नोडल कल्म कतरन एकत्रित किये एवं बाम्बुसा व्युलगेरिस वेर 24 हे 100 पीपीएम आईएए  विसर्जन उपचार दिये गये पिले एवं दुगुने नोडल कटिंग्स फरवरी में संग्रहित किये  डेन्ड्रोकैलमस स्ट्रीक्टस मे एवं 24 हे 100 पीपीएम आइएए ं बड़े पैमाने पर वनसति उपचार प्रवर्धित किये गये ।

  • अल्बिजिया प्रोसेरा के नये जड़ कतरन 2एएमकेएमएनओ4, मे, एक नॉन-एक्नि आर्थिक अकार्बनिक नमक,  27.3% नियंत्रण पर वृक्ष जड़ो को विकसित किया गया । 

  • केएमएनओ4 द्विपद कार्य करनेवाले वृक्ष  जड़ विशेषताओं प्रदिर्शित किया गया, एझडिरैक्टा की कतरन कटिंग्स के त्वरित डिपिंग इण्डिका 1000पीपीएम आईबीए रोटिंग 100% एवं उच्चतम रूट बायोमास का प्रयोग परीक्षण कर प्रदर्शित किया गया ।

  • सागौन में रिहिझिनेसिस   ब्युड तोडने हेतु अप्रैल-जून  अवधि  जड प्रेरण हेतु अच्छी अवधि रही ।  आकस्मिक जड़ प्रेरण और विकास लंबे फोटोपेरियड और न्युन विकिरण की  जरुरी साबित हुई ।  बेसल डिप उपचार के रूप में 18 घंटे के लिए 1000 पीपीएम आईबीए 800 पीपीएम + थियेमाइन के प्रकार्य प्राकृतिक स्थिति तहत 60%  आकस्मिक जड़ो तक की प्रेरण प्रयोग कर सुनिश्चित की गई ।   12 एमएम एसकोरबिक एसिड  की प्रकार्य मात्रा  नवअंकुरित पत्तेदार कलमों में प्रेरण और आकस्मिक जड़ों के विकास में प्रेरणादायक विकसित किया गया । 

  • अल्बिजिया प्रोसेरा की परिवक्व पेड़ों से क्लोनल पौधे के उत्पादन के लिए गैरहार्मोनल वायु लेइंग की  विधि प्रयोग प्रणाली से विकसित की गई ।  100 पीपीएम आईबीए एनचे नवअंकुरित शूट कटिंग में 68 % से प्रेरण एवं आकस्मिक जड़ो के वृद्धि को बढ़ाया गया ।  आईबीए  अर्धसबफेमिलिस के नवाकुंरित शूट कतरन में आकस्मिक जड़ विशेषताओं की आनुवंशिता को प्रभावकारी  बनाया गया ।

  • डी सिस्सू > डोनर वृक्षों में अंकुरित के उद्भव के साथ चिन्हित सक्रिय विकास की बहाली का सबसे अच्छा रिहिझोजेनिसिस एवं आकस्मिक रिहिझोजेनिसिस के लिए पांच प्रजातियों की व्याप्ति में संभावित पक्ष के अनुकूल रही तथा आकस्मिक वृक्ष वृद्धि में अभिलेखित किया गया ।  एरेबोरस> डी लेटिफोलिया > बी सेरेरा > ए सफल (ए) अंकुरण कलमों के माध्यम से जेमेलिना अरबोरिया के क्लोन प्रक्रिया के विकास (93% विकास पक्ष) एव ं(बी) अर्द्ध दृष्ट लकड़ी कलमों (75% पक्ष) बोसवलिया सेराटा (100% सफलता) तथा शीशम (83% सफलता) के क्लोन प्रजनन के लिए प्रक्रियाओं एयर लेयरिंग मानकिकृत किया गया ।

  • 3एमजी/1बीए एवं 95-98%  रुटिंग के साथ एमएस  तरल माध्यम 0.1एमजी/1आईबीए या 3एमजी/1 एनएए के साथ डेन्ड्रोकैलमस एसपर 16-17 फोल्ड  के शूट मल्टिप्लिकेशन दर को प्राप्त किया गया ।

  • बाम्बुसा बाम्बोस में एमएस तरल  3एमजी/। बीए और 80-85% 3एमजी /। 5 फोल्ड्स  शूट मल्टिप्लिकेशन दर प्राप्त किया गया । ट्रान्सप्लान्टेशन के बाद एनएए 80-90% प्लान्ट सर्वायवल प्राप्त किया गया । 

  • डेन्ड्रोकैलमस मेम्ब्रानसियास में 2एमजी/। बीए के साथ पूरक एमएस तरल माध्यम पर 2एमजी/। आईबीए एवं 90-95% एनएए 15 फोल्ड के शूट मल्टिप्लिकेशन दर  2.25एमजी/। बीए+0-175एमजी/। आईएए एवं 62% 0-125 एमजी/। आई बीए+बीए +3.65एमजी/। कॉमरिन  5 फोल्ड शूट मल्टिप्लिकेशन दर बाम्बुसा न्युटनस पर  प्राप्त की गई ।

  • ढेन्ड्रोकैलमस जिसैन्टस मे, वृक्ष जड़ गुणन दर 4.5एमजी/1 बीए  पूरक एमएस 4.5एमजी/। बीए एवं 90% रूटिंग पर  0.9-4.6एमजी/।+एनएए 1.85एमजी/। 2.25एमजी/। आईबीए शूटिंग मल्टिप्लिकेशन दर 4.56 फोल्ड  3एजी/। बीए+0.5एमएल/। विपुल एवं 2.5एमएल/। अल्कोहालिक राईस ब्रेन उद्धरण +3एमजी/।एनएए डेन्ड्रोकैलम्स स्ट्रिक्टस में प्राप्त किया गया ।

  • बाम्बुसा व्युगैरिस में 4.5 फोल्ड का एक शूट मल्टिप्लिकेशन रेट 2.25/एमजी/। बीए + 0.185एमजी/। एनएए एवं लगभग 60% युक्त रूटिंग एमएस मिडियम पुरक पर प्राप्त किया गया ।  कायम्पफेरिया ग्रैलेन्गा में एमएस सेमी सॉइल्ड मिडियम पूरक 2.7एमजी/। बीए+0.56एमजी/।एनएए  पर अनुसंधान कर  प्राप्त किया गया ।

  • टेक्टोना ग्रैण्डिस में  2.25 एमजी जेमेलिना अर्बोरियामें 4 से 5 गुणा दर 02.25 मिलिग्राम/एल बीए एवं 0.186 मिलिग्राम/एल एनएए के साथ पूरक एमएस माध्यम पर प्राप्त किया गया एवं लगभग 60% रूटिंग एमएस मिडियम पूरक 2.7 एमजी एनएए फोल्ड हासिल किया गया । सात गुणा की शूटिंग दर 0.225एमजी/। बीए एवं 0.215 एमजी/।  केएन के साथ पूरक माध्यम 86% जेमेलिना अर्बोर्स में 10एम आईबी के साथ पूरक डब्यूपीएम प्रयोग प्रणाली के जरिए प्राप्त किया गया ।

 

एनडब्ल्यूएफपी

  • वृक्ष बीजों में आविषालु (टॉक्सिक) कारक हटाने की दिशा में एक प्रयोग प्रणाली विकसित की है  ।

  •  एनडल्यूएफपी रद्दीयों से तैयार संयोजित काष्ठ स्पोन्टैनम सछरम की तुलता में समग्र काष्ठ के बराबर बेहतर

  • यांत्रिक गुणधर्म रहा एवं हार्ड बोर्ड निर्माण के लिए उपयुक्त रहा ।

  • स्टर्च के निष्कर्षण एवं इष्टतम उपज के लिए एक सुधारित प्रयोग प्रणाली को विकसित किये ।

  • बुटिया मोनास्पेरमा से उद्धरणिकृत प्राकृतिक वर्ण का प्रयोग करके कपड़ा रंगाई के लिए तीस अलग शेड्स विकसित किये ।

 

वनवर्धन एवं जेएफएम

  • आईएए प्रयोग प्रणाली का उपयोग कर नीम एवं बबुल में जडें निहित कलमों के उत्पादन हेतु  तकनीक विकसित की है

  • अल्बिजिया प्रोसेरा एवं बबुल (अकेसिया निलोटिका) के पात्रयुक्त नवाकंरित पौधे उत्पादित  करने की प्रणाली विकसित की है ।

  • बीज जनित रोगों के नियंत्रण हेतु वृक्षबीज बोने से पूर्व  उसके उपचार के लिए उपचार विधि मानकीकृत की गई ।

  • एडिरैक्टा इण्डिका, एकेसिया कैट्च्यु, एम्बिका ऑफिसिनैलिस, प्रोन्गमिया पिन्नाटा, एल्बेजिया लेब्बेक, टेरोकार्पस मार्सुपियम, ज्मेलिना अबोरिया, बॉम्बैक्स सिइबा, डाल्बेर्जिया लेटिफोलिया, पोंग्मिया पिन्नाटा एवं एकेसिया कैट्च्यु वृक्ष प्रजातियों के बेहतर गुणता के रोपण उत्पादन संग्रहित करने के लिए रूट ट्रेनर नवांकुरित पौध उत्पादन प्रणाली विकसित की गई ।

  • वन कचरे के प्रयोग से उन्नत खाद उत्पादन प्रणाली का मानकीकरण किया गया ।  

  • अल्बिजिया प्रोसेरा  एवं ज्मेलिना अर्बोरिया के संग्रहण, अकुंरण एवं जीवनक्षमता के लिए बीज प्रौद्योगिकी मापदंड विकसित किये  ।

 

इकमुश्त कार्यप्रणाली

 

कृषिवानिकी
  • कृषिवानिकी प्रभाग  ने वृक्ष प्रजातियॉ, औषधीय पौध, बारहमासी अरहर, घास एवं सब्जी  जैसे महत्वपूर्ण पेड़-फसल संयोजन युक्त कृषिवानिकी विकसित की है ।

  • छत्तीसगढ़ क्षेत्र हेतु बबुल आधारित स्थल में विशिष्ट कृषिवानिकी  प्रतिरूप विकसित किया गया ।

  • एलोपेथिक प्रभाव, वृक्षजड विकास पैटर्न एवं वृक्षारोपण ज्यामिति, गली फसल संयोजन तथा बुच-पैडी संयोजन से संबंधित कृषिवानिकी प्रतिरूप विकसित किया गया ।

  • सागौन एवं सेफ्ड मुसली के कृषिवानिकी प्रतिरूप की  वन औषधीय प्रणाली विकसित  किया  एवं अर्थशास्त्राय हाल निकाला ।

 

परिस्थितिकी विज्ञान

  • कृत्रिम उर्वरको अर्थात् युरिया सिंगल सुपर फॉसफेट, अमोनियम सल्फेट अमोनियम क्लोराइड एवं पोटैश म्युरेट एवं जैवउर्वरक अर्थात् नैट्रिन, फॉसफिन एवं बैक्टिन वृक्ष प्रजातियाँ जैसे पी ड्युल्स, अल्बिजिया प्रोसेरा एवं डल्बर्जिया सिस्सू  जैसे पेड़ प्रजातियों को क्रमशः कोल, कॉपर एवं आइरन माइन में डुबोकर काफी बढ़ी मात्रा में विकसित किया गया  

  • पत्ता लिटटर एवं भूसी म्युलचिस के पोषक तत्वो तेज, अल्बिजिया  प्रोसेरा और डल्बेर्जिया सिस्सू कोयला, ताबां और लोहे में शीशम में वृद्धि और बायोमास उत्पादन पत्थर/बजरी औस घास म्युल्चिस के ऊपर एक सकारात्मक तरीके से विकसित किया गया ।

 

कीटविज्ञान

  • सिपरमेर्थिन 0 @ 03% पित कीट की वजह से नुकसान से तेंदू पत्ते की रक्षा के लिए बेहद कारगर साबित हुआ ।

  • 0.005%@ सिपरमेर्थिन ल्युकेइना फिल्लिड, हेटेरोप्सील्ला क्युबा के प्रतिकुल 0.005% एवं 0,-03% मानोक्रोटोफॉस @ डेल्टैमेथोरिन द्वारा अनुसरण कर सबसे प्रभावी साबित हुआ ।

  • मोनोक्रोटोफॉस के पत्ते का छिड़काव 0.04% युरेमा एसपीपी के लार्वा को मारने के लिए बहुत ही कारगर साबित हुआ ।  और रेहिसला सपा अल्बिजिया पत्ते हानिकार इंगित हुए । 

  • सिपरमेर्थिन एइलैन्थस डिफोलियटर के लार्वा, (एटटेवा फैब्रिसिइयेल्ला) के प्रतिकूल मेलथियान से विषाक्त 18 बार ब्लैकबेरिस साबित हुई ।  फेनवेलेरेटइससे संबंधित विषाक्तता में सिपेरमेर्थिन के दुसरा पाया गया ।

  • 0.0038% सिपेरमेर्थिन के पत्ते का छिड़काव ए फैब्रिसेइल्ला के लार्वा के प्रतिकूल अत्यधिक कारगर साबित हुआ ।

  • सिपरमेर्थिन 0.005% या फेनवेलेट  0.01%  या डेल्टमेर्थिन 0.03 के पत्ते छिड़काव  कुल्लु (स्टेरक्युलिया युरेन्स) पत्ते डिफोलियटर  प्रतिकूल  अत्यधिक कारगर साबित हुआ ।

  • डेल्टैमेर्थिन एवं अल्फामेर्थिन 22118 एवं सिस्सू डिफोलियटर के लार्वा के प्रतिकूल मेलैथियन को विषाक्त के रूप में 21 831 टाइम्स  प्रयोग  प्रणाली से सफल बना दिया ।

  • मोनोक्रोटोफॉस  मोरनिंगा के 12 पत्ते का 0.4% छिड़काव लार्वा के प्रतिकूल अत्यधिक कारगर साबित हुआ । 

  • मोनोक्रोटोफॉस के 12 पत्ते का छिडकाव सितम्बर माह में 0.5 बीज बोरर, बी  मोनोक्रोटोफॉस 12 के बिलिनियाटोपिगस के नियंत्रण के लिए प्रभावकारी साबित हुए । 

  • 10 0सी निम्न साल बज के भंडारण के प्रति उच्चतम बोरर से गिरावट दर्शित हुए  जिसे बचाये रखने की दिशा में प्रयोग किया एवं अनुकूल परीणाम प्राप्त किया गया ।

  • औषधीय पौधों को नुकसान पहुँचाने वाले कीटक जो कि अमलतास, सोलेनम कुल्फा, एस खसियनम, ओपेरक्युलिन टर्पन्थियम, बमुची, एबेलमोस्चिस क्रिनिटस अर्बोट्रिस्टिस, टिलोफोरिया अस्थामेटिका, अर्जिमिया जैसे 8 औषधीय पौध प्रजातियों की जाँच की एवं उनके नियंत्रण के उपयोगी साधन की खोज कर प्रदर्शित किया गया ।  

  • भृंग के हमले से  10 दिन में वृक्ष प्रजातियों को बचाने की दिशा में प्रयोग प्रणाली से प्रक्रिया अपना कर  प्रणाली को कारगर साबित किया गया ।

  • बेसिलस थुरिनजेस्निस वे पत्ते का छिड़ाव 10% ! कुरस्टकी (बरटेक) सागौन डेफोलियटर तथा पौधशाला एवं नवांकुरित वृक्षारोपण में अन्य प्रमुख कीटों के प्रतिकूल अत्यधिक प्रभावी  पाया गया ।

  • दो कवक 1.7 एक्स 107 और नीम के तरल पदार्थ रिस्पेटिवेमेन्ट की  एक छोडी मात्रा के साथ 1.5 के साथ  बीजाणुओं/ एमएल सागौन डिफोलियटर एवं स्केलटोनाइझर की उच्च प्रतिरोधी लार्वा के प्रतिकूल प्रभावी पाया गया @ बेनवेरिस एवं मटेरिझियम एनिसोप्लिएस बैरिसमा  प्रभावकारी पाये गये ।

  • स्केलेटोनाइझर 1.5 लाख @ विदेशी पोलिफोगस अंडा पैरासीटोइड ट्राइकोग्रामा ब्रेसिलेन्सिस/हैक्टेयर सागौन पत्तीयों को नष्ट कराने से बचा दिया ।

  • डिफोलियटर लार्वा के पत्ते छिडकावः 04% मोनोक्रोटोफॉस मोरिंगा पत्ता  लार्वा के प्रतिकूल अत्यधिक कारगर  साबित हुआ ।

  • मोनोक्रोटोफॉस 00 के पत्ते के छिडकावः मध्य सितम्बर में 05% बीज बोरर, बी बिलिनियटोपिगस के नियंत्रण के लिए प्रभावी रहा ।

  • बोरर से गिरावट  से बचाने हेतु 10 0सी स्तर के साल बीज भंडारण विकसित किया गया । 

  • औषधीय  पौध प्रजातियों को नुकसान पहुंचाने वाले 8 कीटको  अर्थात् अमलतास, सोलेतम कुल्फा, एस खसिएम, ओपेरक्युलिना टुरफेन्टम, बकुची, एबेलमोक्यु क्रिन्टस, निक्टैन्थस अर्बोट्रिस्ट एर्बोट्रिस्ट्स, टायलोफोरा असथैमेटिका, अर्जेनिया  भारतवर्ष में पहचान की और उनके नियंत्रण के उपायों की जांच की गई ।

  • वृक्ष प्रजातियों को नुकसान पहुंचानेवाले भृंग के 10 दिन में लॉन का जल मसल युक्त पावडर तैयार किया जो वृक्ष को भृंग के हमले को  बचाता है ।

  • बेसिलस थुरिनजेन्सिस  वर 1.0% के पत्ते छिडकाव कुरस्टकी (बीटीके) सागौन डिफोलियटर और पौधशाला एवं नवाकुंरित वृक्षरोपण में अन्य प्रमुख कीटों के प्रतिकूल प्रयोग किया जो  अत्यधिक प्रभावी  रहा ।

  • दो कवक अर्थात् 1.7 एक्स 107 और नीम का तेल रिसपेटिवेमेंट की एक छोटी मात्रा के साथ 1.5 एक्स 107 बीजाणुओ/एमएल सागौन डिफोलियटर तथा स्केलेटोनाइझर की उच्च प्रतिरोधक लार्वा के प्रतिकूल @ बेयुवेरिया एवं मेटेरिझियम एनिसोप्लिइ बार्सिनल  प्रभावी पाया गया । 

  • ट्राइकोग्रामा ब्रैसिलेन्सिस/हेक्टेयर सागौन पत्ती स्केलेटोनाइझर की  1.5@  घटाव को दबा दिया ।

  • 11 कीटनाशकों, स्पीरेमा रेटोरटा के लार्वा के प्रतिकूल 12 कीटनाशकों (डेल्टामेर्थिन अनुसरण) डेल्टामेर्थिन सबसे अच्छा साबित हुआ एन्टेक्टोना मैचिरैलिस हैबेलेइय प्युरा के लार्वा के प्रतिकूल छह कीटनाशकों के सापेक्ष विषाक्तता (क्रिप्सीप्टी कोसेसलिस  सबसे अच्छा साबित डेलमेर्थिन के बाद) क लर्वा के प्रतिकूल दो कीटनाशको के सापेक्ष विषाक्तता कीटनाशको (एंडोसल्फान की जांच की गई जिसमें मोनाक्रोटोफॉस कारगर साबित हुआ । 

  • 0.001%  डेल्टामेट्रीन, सिपेमर्थिन एवं 0.002% 12 का छिडकावः 08% मोनोक्रोटोफॉस की सागौन (हैबिया पुरेया और एन्टेक्टोना माचेरलिस्ट्स) अल्बिजिया पत्ते फीडर, स्पिरेमा रेटोरेटा और बांस के पत्ते रोलर के लार्वा के नियंत्रण के लिए क्रमशः क्रिप्स्टी कोसेलियलिस सबसे अच्छा साबित पाया गया ।

  • एनटोमो रोगजनक कवक के बीजाणु सांद्रता, बियुवेरिया बासियना @ 1-7X10 बीजाणुओं/एमएल साल बोरर की ग्रुब्य्स को मारने के लिए होप्लोसेरब्मिक्स स्प्र स्पीनिकोमिस्ट छह दिन में  बेहद कारगर साबित हुआ । 

  • एंडोसल्फान का 0.5%  पानी पायसः साल बोरर्स के प्रत्यक्ष इसकी प्रभावशीलता खोने के बिना जाल के रूप में पीटा लाल लॉन पर एक नई विधि 0 छिडकाव क्षरा विकसित किया गया ।

  • ट्राइकोग्रामा रवोइ के 1.25 लाख /हेक्टेयर @  प्रयोग से इन कीटों के हमले की वजह से वार्षिक वृद्धि में कम से कम 50% नुकसान को कम करने में प्रभावी पाया गया ।

 

रोगविज्ञान

  • स्टेरक्युलिया युरेन्स के नौ पत्ते रोगजनकों, 4 सर्पगंधा और उष्णकटिबंधीय पाइंस के प्रत्येक वन पौधशाला और बागानों से दर्ज किए गए ।  जुलाई अगस्त डिथेन एम-45 में 0.2% बेसिस्टीन स्प्रे वृक्ष रोग नियंत्रित करने में सफल साबित हुआ । 

  • पैल्लिडोरोसियम फ्युसरिम, एसपेरगिल्लस नाइझर, ए फ्लेवस, पेनिसिलियम एवं अल्टरनेरिया, बांस, पोंगमिआ पिन्नाटा और एझडिरैक्टा इंडिका फंगीसाइड्स जैसे डिठाने एम-45, फिटोलोन, बेविस्टिन कैप्टफ और बीज पैलेट्टिंग के रूप में 0.2% मिकोफ्लोरा को नियंत्रित करने में कारगर पाया गया । 

  • फ्युसरियम प्रजातियों की वजह से रूट सडांध रोग जैसे पॉगमिया पिन्नाटा, एझडिरैक्टा इंडिका, टेक्टोना ग्रैण्डिस, बबूल निलोटिका, शीशम, अल्बिजिया प्रोसेरा आदि के वन पौधशालाओं में प्रभावी ढंग से मई-जून के माह के दौरान पाक्षिक अंतराल पर बेविस्टिन 0.2% के प्रयोग के साथ नियंत्रित किया गया ।

  • डी सिस्स्ा ए प्रोसेरा बबुल प्रजातियों  में गेनाडर्मा की वजह से रूट-सडांध सैल्फि हथेली और सबसे विनाशकारी रोग, तटरक्षक, एमएस के रूप में देखा गया ।  ओडिशा 2:20, 1 जलाव दो की मिट्टी ड्रेचिंग बरगंडी मिश्रण / वृक्ष 3 माह के अंतराल एवं अलगाव खाइयों की खुदाई (45 सेमी गहरी 30 से मी चौडाई) पर वृक्षारोपण में रूट संडांध फैलाकर नियंत्रित करने के लिए प्रभावी पाया गया । 

  • सैरोक्लाडियम ओरेझई ओडिशा में बाम्बुसा न्युटैन्स में गंभीर तुषार व्याधि का कारक रहा ।  व्याधि की घटना   मार्च और अप्रैल, जुलाई के पहले सप्ताह के दौरान  क्ल्युम्प्प्स औ सडा हुआ एझडिरैक्टा इंडिका  तेल केक के प्रयोग  के दौरान  डालों के कूडे के प्रकाश जलने से कम से कम कर दिया गया ।

  • उष्णकटिबंधीय पाइन्स एवं  कैज्वेरिना वृक्षारोपण में मैक्रोफोमिना फेसियोलिना के वजह से लकड़ी का कोयला रूट- सडांध होता है ।  रूट-सडांध संक्रमण अप्रैल-जून में मृदा सराबोर रूप बेविस्टिन 0.2% के  प्रयोग के जरिये न्युनतम किया गया ।

  • हेप्लोस्पोरेल्ला बबूल निलोटिका और ए प्रोसेरा का  नूतन वृक्षारोपण में नष्टता होने से अगस्त सितम्बर के दौरान मासिक अंतराल पर डिथ्ने एम -45 में 0.2% के साथ कवकनाशी स्प्रे बहुत प्रभावी पाया गया ।

  • वृक्ष के  उत्पादन  हेतु कम लागत के उपचार के लिए संकाय  विकसित किया गया । 

 

 

एनडब्ल्यूएफपी

  • अल्स्टोनिया स्कॉलरिस, ज्मेलिना अर्बोरिया एवं क्रैटेवा मैग्ना की कृषि वानिकी तकीक का मानकीरण किया गया ।

  • डाटाबेस प्रबंधन पैकेज एनडब्ल्यूएफपी प्रजातियों के वृद्धि हेतु विकास कार्य अपनाया, डाटा पैकेज कार्य में स्थानीय नाम, वानस्पतिक  नाम वाणिज्य नाम सक्रिय समाग्री मिट्टी के प्रकार उसके वर्धन पद्धतियाँ जो इंटरैक्टिव प्रक्रिया से जानकारी पुनर्प्राप्त करने 75 से अधिक वृक्ष प्रजातियों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया । 

  • वनवर्धन एवं जेएफएम

  • बोसवेलिया सेर्राटा, लैजेरस्ट्रोमिया परविफ्लोरा, प्टेरोकार्पस मर्सुपियम एवं स्टेरेक्युलिया के पौध तकनीक को विकसित किया  और बीज अंकुरण तथा बीज बुवाई का काफी मात्रा में पोषक तत्वो की आपूर्ति के युरेन मानकीकरण को विकसित किया गया ।

  • अवकृष्ट मृदा के लिए तेज पत्ता सियेमिया एवं शीशम के विकसन हेतु बेहतर वृक्षारोपण तकनीक गड्ढे आकार, प्रकार और उर्वरक की खुराक का मानकीकरण कर पौघ विकास में वृद्धि लाने की दिशा में प्रयोग प्रणाली विकसित की गई ।

  • पोंगमिया पिन्नाटा के लिए विकसित की प्रयोग प्रक्रिया का एक सुधार पैकेज, अल्बिजिया प्रोसेरा, अल्बिजिया लेब्बेक, शीशम, डाल्बेर्जिया लेटिफोलिया, जेमेलिना अर्बोरिया, बबूल कैच्यु जो बीज अंकुरण, विकास एवं गुणवत्ता की बुआई की गहराई में हेर-फर से पौध की पॉटिंग के मिश्रण और उचित किस्म के उर्वरक का प्रयोग विकसित किया । 

  • इष्टतम स्पेसेमेंट एवं बेहतर अस्तित्व एवं ए प्रोसेरा के विकास के लिए उर्वरको की वृद्धि क्षमता ए और डी सिस्सू लेब्बेक का प्रयोग प्रणाली के जरिए मानकीकरण किया गया ।

  • उर्वरक प्रयोग हेतु प्रोटिन प्रतिक्रिया अस्तित्व और ए प्रोसेरा ए लेब्बेक, पी पिन्नाटा, डी सिस्सू के विकास के संबंध मे प्रयोग प्रणाली का मानकीकरण किया गया ।

  • जैवउर्वरक के  प्रयोग को बढ़ावा देने सहित ग्रोथ पदार्थ पौधशाला में अल्बिजिया लेब्बेक, ए  प्रोसेरा और बबूल एकेसिया निलोटिका के अंकुरण विकास को बढ़ाया गया ।

  • वीएएम और हिंजोबियम की संयुक्त प्रयोग प्रणाली  से पौधशाला इंटर्नश्पि पर पौध की वृद्धि को बढ़ाने में अत्यधिक प्रभावकी पाया गया ।

 

जननद्रव्य तथा उत्पादन संख्या

  • उ.व.अ.संस्थान ने बांस की 17 प्रजातियॉ सहित 80 जेनेरा एवं मध्य भारतवर्ष के वन उत्पत्ति के 40 भंजन की  120 वृक्ष प्रजातियों से युक्त एक वानस्पतिक उद्यान स्थापित किया । 

  • जैवउर्वरक (विएएम कवक एझोस्पिरिल्लियम, पीएसबी, एझोटोबैक्टर, रिहिझोबियम) विशिष्ठ वृक्ष प्रजातियों के पहत्वपूर्ण जर्माप्लाजम बैंक विकसित किया । 

  • अलग-अलग राज्यों से निम्नलिखित पेड़ प्रजातियों के जननद्रव्य संग्रहित किये । 

 

 

       वृक्ष प्रजातियाँ

              अलग-अलग राज्यों से संग्रहित जननद्रव्य की  संख्या

मध्यप्रदेश

महाराष्ट्र

छत्तीसगढ़

ओडिशा

उत्तरप्रदेश

गोवा

असम

 

ऐाले मार्मेलोस (बेल)

10

07

01

01

-

-

-

पिल्लान्थुस एम्बिका (आओंला)

09

02

04

01

-

-

-

मधुकालॉग्जिंफोलिया वर  (महुआ)

25

04

15

08

01

-

-

बुचनानिया लैंजे (चिरोंजी

04

-

05

06

-

-

-

हर्रा  

09

03

04

-

-

-

-

मलकानग्ंिन

04

-

01

-

-

-

-

गुग्गाल

02

-

-

-

-

-

-

कुसुम

08

-

09

01

-

-

-

कोका

04

-

-

-

-

01

-

नागकेशर

-

01

-

01

-

-

01

पिसा

-

01

-

-

-

-

-

  •      निम्नलिखित उत्पादन संख्या  क्षेत्रफल स्थापित किये ।

 

  • किस्म

    वृक्ष प्रजातियाँ

     

    क्षेत्रफल (हे)

    बीज उत्पादन क्षेत्र

    सागौन कैज्वेरिना इक्विसिटिफोलिया

    500

    क्लोनल बीज फलोद्यान

    सागौन

    कैज्वेरिना इक्विसिटिफोलिया

    अल्बेजिया प्रोसेरा

    44

    नवाकुंरित पौध बीज फलोद्यान

    सागौन

    अल्बेजिया प्रोसेरा

    90

    वनस्पति गुणन उद्यान

    सागौन

    अल्बेजिया प्रोसेरा

    कैज्वेरिना इक्विसिटिफोलिया

    10

 

 

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